- गढ़वा में जलछाजन विकास परियोजना को मिली नई दिशा
- जिला स्तरीय समिति की बैठक में DPR संशोधन को स्वीकृति, किसानों और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण को मिलेगा बड़ा लाभ
गढ़वा। उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति/जिला योजना समिति की महत्वपूर्ण बैठक समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित जलछाजन विकास अवयव–प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 (WDC-PMKSY 2.0) के स्वीकृत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) में Natural Resource Management (NRM) एवं Production Enhancement मदों के आंशिक संशोधन पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी दक्षिणी वन प्रमंडल, गढ़वा द्वारा संशोधित DPR का प्रस्तुतीकरण पावर प्वाइंट (PPT) के माध्यम से किया गया। प्रस्तुतीकरण के उपरांत समिति के सदस्यों ने विभिन्न बिंदुओं पर सुझाव दिए, जिनके आधार पर परियोजना को और अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनाने का निर्णय लिया गया।
उपायुक्त ने कहा कि जलग्रहण विकास परियोजना का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को गति देना भी है। उन्होंने परियोजना के क्रियान्वयन को बेहतर एवं परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष बल दिया।

बैठक में बताया गया कि पूर्व स्वीकृत DPR में शामिल NRM-Plantation गतिविधियों में आवश्यक संशोधन करते हुए स्थानीय परिस्थितियों एवं परियोजना की समय-सीमा को ध्यान में रखा गया है। वृक्षारोपण कार्यों के दीर्घकालीन रख-रखाव की आवश्यकता तथा सितंबर 2026 तक निर्धारित परियोजना अवधि को देखते हुए अन्य व्यवहारिक एवं लाभकारी गतिविधियों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया।
इसके अलावा NRM मद के अंतर्गत पूर्व प्रस्तावित 24 तालाबों के स्थान पर स्थल निरीक्षण के आधार पर 11 उपयुक्त तालाबों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही DCT, WAT, चेक डैम, LBS तथा फील्ड बंडिंग जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को भी प्राथमिकता दी गई है, जिससे “रिज टू वैली” (Ridge to Valley) की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके और जल, मिट्टी एवं प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि Production Enhancement से संबंधित गतिविधियों का चयन किसानों की मांग, अनु जलग्रहण समिति की अनुशंसा तथा क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाएगा, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके और कृषि उत्पादकता में वृद्धि हो।
समिति के सभी सदस्यों द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श एवं सुझावों के उपरांत संशोधित DPR को स्वीकृति प्रदान करते हुए अग्रेतर कार्रवाई हेतु भेजने का निर्णय लिया गया।
बैठक के अंत में उपायुक्त ने संबंधित विभागों एवं परियोजना से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वीकृत कार्यों का क्रियान्वयन गुणवत्ता एवं पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि परियोजना का समग्र लाभ ग्रामीण समुदाय और किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।
बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी, दक्षिणी ई.बी. अब्राहम, उप विकास आयुक्त प्रेमलता मुर्मू, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी, जिला तकनीकी विशेषज्ञ सहित अन्य सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित रहें।










